UNESCO की पाकिस्तान को दोटूक चेतावनी! खतरे में प्राचीन तक्षशिला, विश्व धरोहर का दर्जा छिनने का मंडराया संकट
नई दिल्ली: पाकिस्तान स्थित विश्व प्रसिद्ध पुरातात्विक धरोहर तक्षशिला को लेकर संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक संस्था यूनेस्को ने गंभीर चिंता जताई है। तक्षशिला परिसर में कराए गए संरक्षण कार्यों पर आपत्ति दर्ज करते हुए यूनेस्को ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि यदि कथित खामियों को दूर नहीं किया गया तो इस ऐतिहासिक स्थल को विश्व धरोहर सूची से हटाकर ‘संकटग्रस्त विश्व धरोहर’ सूची में शामिल किया जा सकता है।
संरक्षण कार्यों पर यूनेस्को की सख्त आपत्ति
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने संरक्षण कार्यों के दौरान प्राचीन संरचनाओं में सीमेंट और आधुनिक चिनाई का उपयोग किया। यूनेस्को का मानना है कि इस तरह की सामग्री का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय संरक्षण मानकों के अनुरूप नहीं है और इससे स्मारकों की ऐतिहासिक प्रामाणिकता तथा मूल स्वरूप प्रभावित होता है।
सिरकप और मोहरा मोरादू बने विवाद की वजह
विवाद विशेष रूप से तक्षशिला पुरातात्विक परिसर के सिरकप और मोहरा मोरादू स्थलों पर किए गए कार्यों को लेकर सामने आया है। हाल ही में पाकिस्तान के राष्ट्रीय विरासत एवं संस्कृति मंत्रालय के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में यूनेस्को ने इन हस्तक्षेपों को अनावश्यक बताया और कहा कि ऐसे बदलाव ऐतिहासिक धरोहर की विश्वसनीयता को कमजोर करते हैं।
शिकायत के बाद यूनेस्को ने लिया संज्ञान
बताया गया है कि मार्च में एक पर्यटक ने पेरिस स्थित पाकिस्तान के यूनेस्को प्रतिनिधि को संरक्षण कार्यों की तस्वीरें और जानकारी भेजी थी। इसके बाद मामला यूनेस्को के संज्ञान में आया। शिकायत में दावा किया गया कि कई स्थानों पर मूल पुरातात्विक दीवारों की जगह नई चिनाई कर दी गई या उनकी ऊंचाई बढ़ा दी गई। यूनेस्को का कहना है कि ऐसे बदलाव स्थल की प्रामाणिकता और अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।
तस्वीरों में दिखे आधुनिक निर्माण के संकेत
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि संबंधित स्थलों की तस्वीरों की समीक्षा में कई स्थानों पर प्राचीन पत्थरों की जगह आधुनिक और समान आकार के तराशे हुए पत्थरों का इस्तेमाल दिखाई दिया। जबकि मूल निर्माण अनियमित आकार के प्राचीन पत्थरों से किया गया था।
पाकिस्तान ने आरोपों को किया खारिज
पंजाब पुरातत्व विभाग ने यूनेस्को की आपत्तियों से असहमति जताई है। विभाग के महानिदेशक मलिक ज़हीर अब्बास का कहना है कि यह पुनर्निर्माण नहीं बल्कि संरक्षण कार्य है। उनके अनुसार कमजोर हो चुकी संरचनाओं को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से सभी कार्य अंतरराष्ट्रीय संरक्षण सिद्धांतों के अनुरूप किए गए हैं और किसी प्रकार का पुनर्निर्माण नहीं किया गया।
यूनेस्को की टीम ने किया स्थल का निरीक्षण
विवाद के बाद 12 जून को यूनेस्को की टीम ने पाकिस्तान के पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग तथा राष्ट्रीय विरासत एवं संस्कृति मंत्रालय के अधिकारियों के साथ तक्षशिला संग्रहालय और आसपास के पुरातात्विक स्थलों का निरीक्षण किया। इस दौरान पंजाब पुरातत्व विभाग ने अपने संरक्षण कार्यों का प्रस्तुतीकरण भी दिया और दावा किया कि सभी कदम धरोहर संरक्षण के उद्देश्य से उठाए गए हैं।
अन्य विरासत स्थलों पर भी पड़ सकता है असर
इस विवाद का प्रभाव केवल तक्षशिला तक सीमित नहीं माना जा रहा। यदि यूनेस्को इस मामले में सख्त रुख अपनाता है तो पाकिस्तान के अन्य ऐतिहासिक स्थलों को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की कोशिशों पर भी असर पड़ सकता है। पाकिस्तान वर्ष 1997 से 24 अतिरिक्त स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने का प्रयास कर रहा है, जिनमें रानी घाट और भानभोर जैसे प्रमुख ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं।
रामायण, महाभारत और चाणक्य से जुड़ा है तक्षशिला का इतिहास
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में इस्लामाबाद से करीब 35 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम स्थित तक्षशिला भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे प्राचीन शिक्षण और सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। प्राचीन गांधार क्षेत्र का हिस्सा रहे तक्षशिला का उल्लेख रामायण, महाभारत और अनेक संस्कृत ग्रंथों में मिलता है।
छठी शताब्दी ईसा पूर्व से पांचवीं शताब्दी ईस्वी तक तक्षशिला शिक्षा, चिकित्सा, राजनीति और दर्शन का प्रमुख केंद्र रहा। परंपरा के अनुसार आचार्य चाणक्य और महान वैद्य चरक का संबंध भी इसी स्थान से माना जाता है। मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने लगभग 316 ईसा पूर्व इस क्षेत्र को अपने साम्राज्य में शामिल किया था।
तक्षशिला परिसर में आकेमेनिड, मौर्य, इंडो-ग्रीक, कुषाण और गुप्त काल के महत्वपूर्ण पुरातात्विक अवशेष मौजूद हैं। इसके ऐतिहासिक और वैश्विक महत्व को देखते हुए यूनेस्को ने वर्ष 1980 में इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल किया था। अब संरक्षण कार्यों को लेकर उठा विवाद इस अमूल्य सांस्कृतिक विरासत के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
