5वीं तक के विद्यार्थियों को मोबाइल पर होमवर्क न दें, यूपी बेसिक शिक्षा अधिकारी ने स्कूलों को किया निर्देशित

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सीतापुर। कम उम्र के बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखने और उनकी मानसिक व शारीरिक सेहत को सुरक्षित रखने के लिए जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर ने स्कूलों को सख्त आदेश दिए हैं। निर्देश के अनुसार पांचवीं तक के छात्रों को होमवर्क, प्रोजेक्ट वर्क या अन्य शिक्षण सामग्री मोबाइल पर भेजने की अनुमति नहीं होगी, जब तक यह अनिवार्य न हो। बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) अखिलेश प्रताप सिंह ने इस आदेश के पालन की जिम्मेदारी सभी स्कूलों को सौंपते हुए इसकी सख्ती से निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।

सामाजिक घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

इस कदम के पीछे गाजियाबाद की वह दुखद घटना भी है, जिसमें मोबाइल फोन वापस न करने पर तीन छात्राओं ने नौवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता सिंह चौहान ने भी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की थी। ऐसी घटनाएं समाज में गंभीर चिंता का कारण बनी हैं और बच्चों के मोबाइल उपयोग पर नियंत्रण की आवश्यकता को उजागर करती हैं।

मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक

जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर ने कहा कि बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने के लिए डायरी या कागज आधारित होमवर्क और प्रोजेक्ट वर्क को लागू किया जाएगा। बच्चों में मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। कोरोना काल में ऑनलाइन कक्षाओं के कारण बच्चों में मोबाइल की आदत बढ़ी, और अब वे ऑनलाइन गेमिंग और अन्य डिजिटल गतिविधियों के शिकार हो रहे हैं।

एकाग्रता और सामाजिक कौशल पर पड़ रहा असर

जिला अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. प्रांशू अग्रवाल ने बताया कि लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन देखने से बच्चों में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कम हो जाती है। बच्चे अक्सर अकेले रहना पसंद करने लगते हैं और सामान्य सामाजिक बातचीत की आदत नहीं डाल पाते। छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन, भूख कम होना, नींद न आना और तनाव जैसी मानसिक समस्याएं बढ़ रही हैं।

नेत्र स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव

जिला अस्पताल के नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. पीके सिंह ने बताया कि मोबाइल पर लंबे समय तक नजरें टिकाए रखने से बच्चों की आंखों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। निकट से मोबाइल देखने के कारण दूर की वस्तुएं स्पष्ट नहीं दिखाई देतीं, जिसे मायोपिया कहते हैं। इसके अलावा आंखों में जलन, धुंधला दिखाई देना, सिरदर्द और कम उम्र में चश्मा लगने जैसी दिक्कतें तेजी से बढ़ रही हैं।

 

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