High Blood Pressure का आयुर्वेदिक इलाज क्या है? जानिए बिना दवा के बीपी कंट्रोल करने के उपाय

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नई दिल्ली: आधुनिक जीवनशैली के बीच भारत में हृदय रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन अब आम समस्या बन चुकी है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह स्थिति दिल के दौरे समेत कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। आंकड़ों के अनुसार आज बड़ी संख्या में पुरुष और महिलाएं इस समस्या से जूझ रहे हैं। आमतौर पर पुरुषों में हाई बीपी के मामले ज्यादा देखे जाते हैं। एलोपैथी में इसके लिए लंबी अवधि तक दवाएं दी जाती हैं, जबकि आयुर्वेद में आहार-विहार और औषधियों के जरिए इसे संतुलित करने पर जोर दिया जाता है।

हाई ब्लड प्रेशर क्या है?

आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. चंचल शर्मा (डायरेक्टर, आशा आयुर्वेदा और स्त्री रोग विशेषज्ञ) के अनुसार हाई ब्लड प्रेशर का सीधा असर धमनियों पर पड़ता है। इस स्थिति में रक्त का प्रवाह धमनियों की दीवारों पर अधिक दबाव डालता है। यदि लंबे समय तक यह दबाव बना रहे तो हृदय, किडनी और मस्तिष्क जैसे अंग प्रभावित हो सकते हैं।

हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण क्या हैं?

हाइपरटेंशन कई बार बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी हो सकता है, इसलिए इसे ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है। हालांकि कुछ सामान्य संकेत इस प्रकार हो सकते हैं:

सांस लेने में तकलीफ
बार-बार सिरदर्द
नाक से खून आना
गर्दन में दर्द और तनाव

विशेषज्ञों का कहना है कि ये लक्षण अन्य बीमारियों में भी दिख सकते हैं, इसलिए इन्हें नजरअंदाज न करें और समय पर जांच कराएं।

हाई ब्लड प्रेशर के मुख्य कारण

आनुवंशिक कारणों के अलावा कुछ जीवनशैली से जुड़े कारक भी बीपी बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं:

शारीरिक गतिविधि की कमी
असंतुलित और ज्यादा तला-भुना भोजन
अधिक नमक का सेवन
शराब और धूम्रपान
लगातार तनाव
शरीर में पोटैशियम की कमी

आयुर्वेद में हाई बीपी का इलाज कैसे किया जाता है?

आयुर्वेद में हाई ब्लड प्रेशर को त्रिदोष असंतुलन से जोड़कर देखा जाता है। उपचार में दवाओं के साथ आहार, दिनचर्या और पंचकर्म चिकित्सा पर जोर दिया जाता है।

अश्वगंधा: तनाव कम करने और रक्त प्रवाह बेहतर करने में सहायक मानी जाती है। सुबह खाली पेट सीमित मात्रा में इसका सेवन लाभकारी बताया गया है।

त्रिफला: शरीर की सूजन कम करने और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखने में मददगार मानी जाती है। धमनियों में जमा अवरोध को कम करने में भी सहायक बताई जाती है।

तुलसी: एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर तुलसी रक्त संचार को संतुलित रखने में मदद करती है।

पंचकर्म चिकित्सा: आयुर्वेद में वमन, विरेचन, बस्ती, नस्य और रक्तमोक्षण को पंचकर्म की मुख्य प्रक्रियाएं माना गया है। विशेष रूप से विरेचन के जरिए पित्त दोष को संतुलित कर तनाव कम करने और शरीर से विषाक्त तत्व बाहर निकालने की बात कही जाती है, जिससे ब्लड प्रेशर नियंत्रण में मदद मिल सकती है।

लाइफस्टाइल में बदलाव भी है जरूरी

आयुर्वेद के अनुसार नियमित व्यायाम करने वाले लोगों में हाई बीपी की समस्या अपेक्षाकृत कम देखी जाती है। रोजाना एक्सरसाइज करने से हृदय बेहतर तरीके से रक्त पंप करता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा घटता है। संतुलित आहार, कम नमक, पर्याप्त पानी और तनाव नियंत्रण को भी जरूरी माना गया है।

ध्यान रहे, हाई ब्लड प्रेशर एक गंभीर स्थिति है। किसी भी उपचार को शुरू करने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है।

 

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