AIMIM से गठबंधन करने में क्यों हिचक रही सपा? ओवैसी ने अखिलेश यादव को घेरा, बोले- पांच चुनाव हारने के बाद करें आत्ममंथन

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और एआईएमआईएम के बीच गठबंधन को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से सवाल किया है कि उनकी पार्टी एआईएमआईएम के साथ गठबंधन करने से क्यों कतरा रही है। ओवैसी ने अखिलेश को आत्मचिंतन करने की सलाह देते हुए पिछले चुनावों में मिली हार पर भी निशाना साधा।

सीएनएन न्यूज-18 को दिए एक साक्षात्कार में ओवैसी ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि समाजवादी पार्टी उनकी पार्टी के साथ गठबंधन करने से क्यों डरती है। उन्होंने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि वह पांच चुनाव हार चुके हैं और उन्हें खुद आत्ममंथन करना चाहिए।

‘सपा नहीं चाहती कि मुसलमान नेता बनें’

ओवैसी ने समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया कि वह मुसलमानों को राजनीतिक नेतृत्व देने के बजाय केवल मतदाता बनाए रखना चाहती है। उनके मुताबिक, सपा चाहती है कि मुस्लिम समुदाय के लोग वोट देते रहें, लेकिन नेतृत्व की भूमिका में आगे न आएं।

एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि मुसलमानों को अपना स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थापित राजनीतिक दल इस समुदाय को केवल वोट बैंक के तौर पर देखते हैं और उन्हें नेतृत्व में बड़ी भूमिका देने से बचते हैं।

आजम खान से अखिलेश की मुलाकात पर भी उठाए सवाल

ओवैसी ने जेल में बंद समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान से अखिलेश यादव की मुलाकात को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि अखिलेश आजम खान से मिलने जेल तब गए, जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि सपा अध्यक्ष उनसे मिलने नहीं गए थे।

मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र कर सपा पर साधा निशाना

ओवैसी ने समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान वर्ष 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने अखिलेश यादव की सरकार पर निशाना साधते हुए दंगों के दौरान महिलाओं के साथ बड़े पैमाने पर यौन हिंसा होने का आरोप लगाया। इस बयान के जरिए उन्होंने सपा के शासनकाल और उसके मुस्लिम समुदाय के प्रति राजनीतिक रुख पर सवाल उठाए।

रामपुर में भी मुस्लिम नेतृत्व को लेकर दिया था बयान

इससे पहले 18 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के रामपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा था कि उनकी पार्टी मुस्लिम युवाओं को राजनीति में आगे बढ़ने का मंच देना चाहती है। उन्होंने कहा था कि मुस्लिम युवाओं में दूसरे समुदायों के युवाओं जैसी ही क्षमताएं हैं, लेकिन उन्हें अक्सर नेतृत्व करने का अवसर नहीं मिलता।

ओवैसी ने कहा था कि उनकी पार्टी अब नेहरू, गांधी या यादव परिवारों के नेताओं को अपना नेतृत्व नहीं मानेगी। इसके बजाय पार्टी में साथ खड़े युवा पुरुष और महिलाएं नेतृत्व की भूमिका निभाएंगे।

‘अब अब्दुल नेता बनेगा, विधायक और सांसद बनेगा’

ओवैसी ने कहा था कि एआईएमआईएम चाहती है कि युवा विधायक और सांसद बनें, ताकि वे हाशिये पर खड़े समुदायों को न्याय दिलाने के लिए काम कर सकें। उन्होंने स्थापित राजनीतिक परिवारों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि मुस्लिम कार्यकर्ताओं से जमीनी स्तर पर काम करने की अपेक्षा की जाती है, जबकि दूसरे समुदायों के नेता बड़े पदों तक पहुंच जाते हैं।

उन्होंने कहा था कि अब ‘अब्दुल’ भी नेता बनेगा, विधायक बनेगा और सांसद बनेगा। ओवैसी के इन बयानों से उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व और संभावित गठबंधन को लेकर बहस तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

 

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