नए नोएडा में बदल जाएगी शहर की तस्वीर! चौड़ी सड़कों से लेकर गंगाजल तक, 80 गांवों में बसेगा आधुनिक शहर
नोएडा: गौतमबुद्ध नगर में नए नोएडा को बसाने की योजना अब तेजी से आगे बढ़ रही है। करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विकसित होने वाले इस नए शहर को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की तैयारी है। योजना के तहत 80 गांवों की जमीन पर शहर बसाया जाएगा। यहां चौड़ी सड़कें बनाई जाएंगी और घरों में नलों के जरिए गंगाजल की आपूर्ति होगी। नोएडा प्राधिकरण ने परियोजना के लिए बजट आवंटित कर दिया है और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ने लगी है।
नए नोएडा में शामिल हो सकते हैं चार और गांव
नोएडा प्राधिकरण की जीएम प्लानिंग मीना भार्गव के मुताबिक, नए नोएडा को निवेश क्षेत्र की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इसका प्रस्तावित क्षेत्रफल लगभग 200 वर्ग किलोमीटर रखा गया है। मौजूदा नोएडा का क्षेत्रफल करीब 203 वर्ग किलोमीटर है। नए शहर का आकार इसके बराबर करने के लिए चार अतिरिक्त गांवों को शामिल करने की सिफारिश की गई है।
नए नोएडा की प्रमुख विशेषताओं में चौड़ी सड़कें और बेहतर यातायात व्यवस्था शामिल होंगी। शहर के बीच से 130 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क गुजरेगी, जो पूरे इलाके को आपस में जोड़ेगी। इसके दोनों ओर 105, 75, 70, 60 और 45 मीटर चौड़ी सड़कों का जाल तैयार किया जाएगा।
प्राधिकरण के अनुसार, 130 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क तक पहुंचने के बाद शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने में वाहन चालकों को करीब 30 मिनट लगने का अनुमान है। सड़कों की योजना भविष्य की जरूरतों, बढ़ते यातायात और भारी वाहनों की आवाजाही को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
जमीन से नहीं निकाला जाएगा भूजल, गंगाजल से पूरी होगी जरूरत
नए नोएडा में पानी की आपूर्ति के लिए भूजल पर निर्भरता खत्म करने की योजना बनाई गई है। प्राधिकरण का कहना है कि शहर में सप्लाई होने वाले पानी का एक प्रतिशत भी जमीन से नहीं निकाला जाएगा। इसके लिए गंग नहर और उससे जुड़ी दो नहरों का इस्तेमाल किया जाएगा। इन नहरों को विकसित कर जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाया जाएगा।
योजना के तहत नहरों के किनारे कुल 310 एमएलडी क्षमता वाले छह जल शोधन संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इनमें गंग नहर के किनारे 70-70 एमएलडी क्षमता के दो संयंत्र और 30 एमएलडी क्षमता का एक संयंत्र लगाने की योजना है। इन संयंत्रों के जरिए पानी को शुद्ध कर शहर में आपूर्ति की जाएगी।
जमीन अधिग्रहण के लिए अधिकारियों की तैनाती, 32 गांव चिह्नित
नए नोएडा को विकसित करने के लिए जमीन अधिग्रहण की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। इसके लिए दो महाप्रबंधक, 10 वरिष्ठ प्रबंधक और दो लेखपाल तैनात किए गए हैं। परियोजना के शुरुआती दो चरणों में 32 गांवों को चिह्नित किया गया है।
प्राधिकरण के मुताबिक, अब तक 281 किसान अपनी जमीन देने के लिए सहमति जता चुके हैं। जमीन अधिग्रहण से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए प्राधिकरण की ओर से पहले ही 100 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया जा चुका है।
पहले दो चरणों में 5,725 रुपये प्रति वर्ग मीटर मुआवजा
नए नोएडा के लिए किसानों से आपसी सहमति और लैंड पूलिंग मॉडल के आधार पर जमीन लेने की योजना है। प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती दो चरणों के लिए जमीन का मुआवजा 5,725 रुपये प्रति वर्ग मीटर तय किया गया है। इसके अलावा किसानों को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की नीति के अनुरूप छह प्रतिशत विकसित आबादी का भूखंड भी दिया जाएगा।
तीसरे और चौथे चरण में जमीन के मुआवजे के लिए यमुना प्राधिकरण की नीति के आधार पर 4,558 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर निर्धारित की गई है। इन चरणों में किसानों को सात प्रतिशत विकसित आबादी का भूखंड देने का प्रावधान है।
प्राधिकरण की योजना के मुताबिक, पहले चरण में अधिग्रहित जमीन का मुआवजा दिसंबर 2026 से मार्च 2027 के बीच वितरित किया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि 18 अक्टूबर 2024 के बाद नए नोएडा के लिए चिह्नित 80 गांवों की सीमा में होने वाले किसी भी निर्माण को पूरी तरह अवैध माना जाएगा।
1976 में बसा था नोएडा, अब नए शहर की तैयारी
नोएडा की स्थापना 17 अप्रैल 1976 को हुई थी। इसका पूरा नाम न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण है। समय के साथ इस क्षेत्र का औद्योगिक और आर्थिक महत्व बढ़ता गया। इसके बाद 6 मई 1997 को गाजियाबाद के दादरी और बिसरख तथा बुलंदशहर के जेवर और दनकौर ब्लॉक को मिलाकर गौतमबुद्ध नगर जिले का गठन किया गया।
इससे पहले 28 जनवरी 1991 को ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण की स्थापना की गई थी। इसके करीब एक दशक बाद 24 अप्रैल 2001 को यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण का गठन हुआ। अब इसी क्षेत्र में नए नोएडा को विकसित करने की योजना पर काम तेज किया जा रहा है।
औद्योगिक पहचान से वैश्विक शहर बनने तक का सफर
औद्योगिक इकाइयों को विकसित करने के उद्देश्य से बसाया गया नोएडा आज देश के प्रमुख कारोबारी और आवासीय केंद्रों में शामिल है। यहां बड़ी कंपनियों के कार्यालय, कारखाने, शॉपिंग मॉल, बार और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियां मौजूद हैं। शहर में महंगे आवासीय फ्लैटों की भी बड़ी मांग है, जहां 50 करोड़ रुपये तक कीमत वाले फ्लैट खरीदे जा रहे हैं।
नोएडा की पहचान अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत हुई है। जेवर में विकसित हो रहे नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पहले चरण का काम शुरू हो चुका है। ऐसे में प्राधिकरण नए नोएडा को भी आधुनिक सुविधाओं और बेहतर बुनियादी ढांचे से लैस करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। योजना का उद्देश्य ऐसा शहर विकसित करना है, जहां आवास, परिवहन, जलापूर्ति और औद्योगिक निवेश के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों।
