हरतालिका तीज पर भूलकर भी न तोड़ें ये नियम, ऐसे करें व्रत और पूजा; शिव-पार्वती की बरसेगी कृपा
हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने से अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन में खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है। वर्ष 2026 में हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर, सोमवार को रखा जा रहा है। इस व्रत में कई कठोर नियमों का पालन किया जाता है।
सूर्योदय से पहले उठकर लें व्रत का संकल्प
हरतालिका तीज के दिन व्रती महिलाओं को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद हाथ में जल लेकर पूरे श्रद्धाभाव से व्रत का संकल्प लिया जाता है। मान्यता के अनुसार, इस दौरान पूरे दिन और रात निर्जल रहकर भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान किया जाता है।
व्रत के दौरान मन को शांत रखने और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की परंपरा है। विशेष रूप से जो महिलाएं पहली बार हरतालिका तीज का व्रत शुरू करती हैं, उनके लिए इसे बीच में छोड़ना उचित नहीं माना जाता।
शाम को ऐसे करें शिव-पार्वती और गणेश जी की पूजा
शाम के समय स्नान करने के बाद व्रती महिलाएं नए या साफ-सुथरे वस्त्र और आभूषण धारण करती हैं। इसके बाद पूजा स्थल को स्वच्छ करके बालू या काली मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाई जाती है।
इन प्रतिमाओं को चौकी पर स्थापित कर फूल, फल, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं। माता पार्वती को सुहाग की वस्तुएं जैसे सिंदूर, बिंदी और चूड़ियां चढ़ाने की परंपरा है। इसके बाद श्रद्धा के साथ हरतालिका तीज की कथा सुनी जाती है और आरती की जाती है।
रातभर भजन-कीर्तन और जागरण का है विधान
हरतालिका तीज के व्रत में रात के समय जागरण का भी विशेष महत्व माना गया है। व्रती महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करते हुए भजन-कीर्तन करती हैं और पूरी रात जागकर पूजा-अर्चना करती हैं।
धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए इस व्रत से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
अगले दिन ऐसे करें व्रत का पारण
व्रत के अगले दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की अंतिम पूजा की जाती है। इसके बाद पूजा में चढ़ाई गई सुहाग सामग्री किसी योग्य व्यक्ति को दान करने की परंपरा बताई गई है।
दान के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। पारण के समय सबसे पहले जल ग्रहण करने और उसके बाद सात्विक भोजन करने की मान्यता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, व्रत को निर्धारित समय से पहले तोड़ना या पूजा के नियमों की अनदेखी करना उचित नहीं माना जाता।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत श्रद्धा, संयम और भक्ति का पर्व है। भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के साथ इस व्रत को विधिपूर्वक पूरा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति और परिवार में खुशहाली की कामना की जाती है।
