कमजोरी, थकान और तनाव का आयुर्वेदिक तोड़! अश्वगंधारिष्ट से शरीर में भर जाएगी नई जान
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में शारीरिक कमजोरी, मानसिक तनाव और थकान आम समस्या बन चुकी है। ऐसे में आयुर्वेद में एक ऐसी औषधि बताई गई है, जिसे ‘आयुर्वेद का ब्रह्मास्त्र’ कहा जाता है। हम बात कर रहे हैं अश्वगंधारिष्ट की, जो मानसिक, शारीरिक और यौन स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी मानी जाती है। यह सिर्फ दवा नहीं, बल्कि शरीर में ताकत और ऊर्जा भरने वाला ओजवर्धक और बलवर्धक आयुर्वेदिक रसायन है।
नाम में ही छिपा है इसकी ताकत का राज
अश्वगंधा का अर्थ है—घोड़े जैसी शक्ति देने वाली औषधि। आयुर्वेद के अनुसार अश्वगंधारिष्ट वात और कफ दोष को संतुलित करता है, पाचन अग्नि को मजबूत बनाता है और मांसपेशियों व नसों की शक्ति बढ़ाता है। इसका नियमित सेवन मानसिक तनाव को कम करने, नींद की समस्या, अवसाद और थकान में राहत देने में सहायक माना जाता है। साथ ही यह शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है।
पुरुषों के लिए खास लाभकारी
अश्वगंधारिष्ट पुरुषों की रिप्रोडक्टिव हेल्थ को बेहतर बनाने में भी मददगार माना गया है। यह वीर्य से जुड़ी समस्याओं, कमजोरी और ऊर्जा की कमी में उपयोगी हो सकता है। बुजुर्गों में यह याददाश्त और नर्व पावर बढ़ाने में सहायक है, जबकि दुबले-पतले शरीर वालों के लिए वजन बढ़ाने में भी लाभ पहुंचा सकता है।
कैसे किया जाता है अश्वगंधारिष्ट का निर्माण
अश्वगंधारिष्ट अश्वगंधा, मंजिष्ठा, हरड़, बहेड़ा, आंवला, अर्जुन की छाल, वचा, शंखपुष्पी, यष्टिमधु, इलायची, लौंग, तेजपत्ता, गुड़ और धातकी पुष्प जैसी कई जड़ी-बूटियों से तैयार किया जाता है। इन सभी औषधीय तत्वों का काढ़ा बनाकर उसे गुड़ और धातकी पुष्प के साथ किण्वित किया जाता है। सही तरीके से तैयार अश्वगंधारिष्ट लंबे समय तक उपयोग योग्य रहता है।
सेवन का सही तरीका क्या है
अश्वगंधारिष्ट का सेवन भोजन के बाद दिन में दो बार किया जाता है। आमतौर पर 15 से 25 मिलीलीटर मात्रा को बराबर पानी के साथ लेना उपयुक्त माना जाता है। दूध, घी और पौष्टिक आहार के साथ इसका सेवन करने से इसका प्रभाव और बेहतर हो सकता है। महिलाओं में यह मानसिक तनाव और थकान कम करने में सहायक है, हालांकि गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।
केवल दवा नहीं, आयुर्वेदिक जीवनशैली का हिस्सा
अश्वगंधारिष्ट को केवल औषधि कहना कम होगा। यह एक ऐसी आयुर्वेदिक संजीवनी है, जो शरीर को मजबूती, मन को शांति और संपूर्ण स्वास्थ्य को संतुलन प्रदान करती है। कमजोरी हो, थकान हो या मानसिक चिंता—अश्वगंधारिष्ट आयुर्वेद का भरोसेमंद सहारा माना जाता है।
