राम मंदिर चढ़ावा मामले में बड़ा मोड़! आज योगी सरकार को सौंपेगी SIT रिपोर्ट, FIR पर भी हो सकता है फैसला

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अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) सोमवार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप सकती है। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट लगभग तैयार हो चुकी है और इसे देर शाम तक मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजे जाने की संभावना है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी, जिसमें प्रथम दृष्टया दोष मिलने पर एफआईआर दर्ज किए जाने का रास्ता भी खुल सकता है।

15 दिन बाद आएगी अंतिम रिपोर्ट

13 जून को गठित तीन सदस्यीय एसआईटी ने पिछले कई दिनों से मामले से जुड़े दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के बयानों की जांच की है। बताया जा रहा है कि प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के बाद टीम जांच के दूसरे चरण में प्रवेश करेगी। अंतिम रिपोर्ट लगभग 15 दिन बाद शासन को सौंपी जाएगी।

बयानों की दोबारा पड़ताल में जुटी टीम

जांच के दौरान एसआईटी ने कई लोगों के बयान दर्ज किए थे। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले कुछ बयानों में मौजूद विसंगतियों और तथ्यों की पुष्टि के लिए संबंधित लोगों को दोबारा बुलाकर पूछताछ की गई। रविवार को भी जांच टीम लगातार सक्रिय रही और देर रात तक दस्तावेजों की समीक्षा का काम चलता रहा।

प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर दर्ज हो सकती है FIR

सूत्रों का कहना है कि यदि प्रारंभिक जांच में किसी स्तर पर अनियमितता या गबन के पर्याप्त संकेत मिलते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई शुरू की जा सकती है। अंतिम निर्णय शासन स्तर पर रिपोर्ट की समीक्षा के बाद लिया जाएगा।

नए आरोपों की भी होगी जांच

मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर मंदिर निर्माण, चढ़ावे की राशि और कीमती धातुओं के कथित दुरुपयोग को लेकर कई आरोप लगाए गए हैं। अब एसआईटी जांच के अगले चरण में ऐसे आरोप लगाने वाले लोगों से भी पूछताछ कर सकती है। इसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि दावों में कितनी सच्चाई है और क्या उनके समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य मौजूद हैं।

ट्रस्ट के भीतर भी बढ़ी हलचल

जांच के बीच मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों के बयानों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के अनुसार, हाल के कुछ सार्वजनिक बयानों के बाद ट्रस्ट के भीतर असहजता का माहौल बना है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचने की सलाह दी जा रही है।

 

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