क्या इस बार आएगा ‘सुपर अल-नीनो’? 149 साल पुराने मौसमीय बदलाव से तुलना, यूपी में मानसून और बारिश को लेकर बढ़ी चिंता

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लखनऊ: प्रशांत महासागर में बन रही मौसमी परिस्थितियों ने मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। इस बार संभावित अल-नीनो को लेकर कई विशेषज्ञ इसे बेहद शक्तिशाली मान रहे हैं और इसकी तुलना 149 साल पहले यानी वर्ष 1877 की परिस्थितियों से की जा रही है। हालांकि भारतीय मौसम विभाग ने ‘सुपर अल-नीनो’ जैसी किसी आधिकारिक श्रेणी से इनकार किया है, लेकिन बदलते मौसमीय संकेतों पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसी बीच उत्तर प्रदेश समेत उत्तर भारत भीषण गर्मी और लू की चपेट में है।

मौसम विभाग के मुताबिक फिलहाल दक्षिण भारत में मानसून सामान्य से पहले दस्तक दे सकता है। केरल तट पर मानसून के 26 मई तक पहुंचने की संभावना जताई गई है, जबकि उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में इसके सामान्य समय यानी करीब 27 जून तक पहुंचने का अनुमान है।

2024 जैसा फिर बढ़ सकता है गर्मी का खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछली बार वर्ष 2024 में अल-नीनो के असर से भीषण गर्मी देखने को मिली थी। मई 2024 में वर्ष 2016 के बाद सबसे अधिक तापमान दर्ज किया गया था। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यदि इस बार भी अल-नीनो मजबूत हुआ तो गर्मी, उमस और हीटवेव की स्थिति और गंभीर हो सकती है।

इस समय उत्तर प्रदेश के कई जिले भीषण गर्मी से झुलस रहे हैं। बुंदेलखंड का बांदा जिला 48 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ देश का सबसे गर्म इलाका दर्ज किया गया। वहीं प्रयागराज में 48.8 डिग्री, वाराणसी में 47.8 डिग्री और लखनऊ में 45.8 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।

क्या होता है अल-नीनो?

अल-नीनो प्रशांत महासागर में बनने वाली एक मौसमी स्थिति है। इसमें दक्षिण अमेरिकी तट के पास पेरू क्षेत्र का समुद्री तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसके कारण समुद्री हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं और वैश्विक मौसम चक्र प्रभावित होता है।

इसका असर भारत, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के कई हिस्सों में कम बारिश और सूखे के रूप में देखा जाता है, जबकि अमेरिका के पश्चिमी हिस्सों में भारी बारिश और तूफान की स्थिति बन सकती है। वैज्ञानिक इसे वैश्विक तापमान वृद्धि का एक बड़ा कारण भी मानते हैं।

मानसून पर पड़ सकता है असर, अगस्त-सितंबर में कम बारिश की आशंका

आईएमडी की लॉन्ग रेंज वेदर रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून पर अल-नीनो का प्रभाव पड़ सकता है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक यह 1997 और 2015 जैसे मजबूत अल-नीनो की स्थिति बन सकती है, जिससे मानसूनी हवाएं कमजोर हो सकती हैं।

यदि इसका प्रभाव बना रहा तो इस बार कुल मानसूनी बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका है। अनुमान है कि देश में बारिश दीर्घावधि औसत का करीब 92 प्रतिशत रह सकती है। खासकर अगस्त और सितंबर में उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में कम बारिश या सूखे जैसे हालात बन सकते हैं।

हिंद महासागर बन सकता है राहत की वजह

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार हिंद महासागर की परिस्थितियां भारत के लिए राहत लेकर आ सकती हैं। आईएमडी लखनऊ के वैज्ञानिकों का कहना है कि जून के बाद सकारात्मक हिंद महासागर द्विध्रुव यानी पॉजिटिव आईओडी बनने की संभावना है।

इस स्थिति में अरब सागर और पश्चिमी हिंद महासागर का पानी तेजी से गर्म होता है, जिससे समुद्र से अधिक नमी उठती है और मानसूनी हवाओं को ताकत मिलती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह स्थिति अल-नीनो के प्रभाव को काफी हद तक कमजोर कर सकती है।

इसके चलते जून और जुलाई के शुरुआती महीनों में देश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है, भले ही मानसून के उत्तरार्ध में बारिश कुछ कम रहे।

1997 में भी नहीं बिगड़ा था मानसून

आईएमडी लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार वर्ष 1997 में भी अल-नीनो बेहद मजबूत था, लेकिन उस समय हिंद महासागर की अनुकूल परिस्थितियों ने भारत में मानसून को प्रभावित नहीं होने दिया था। इस बार भी वैज्ञानिक इसी तरह के संतुलन की उम्मीद जता रहे हैं।

यूपी के प्रमुख शहरों में अधिकतम तापमान

प्रयागराज – 48.8 डिग्री सेल्सियस
बांदा – 48 डिग्री सेल्सियस
वाराणसी – 47.8 डिग्री सेल्सियस
लखनऊ – 45.8 डिग्री सेल्सियस
बहराइच – 45.4 डिग्री सेल्सियस
मेरठ – 44.6 डिग्री सेल्सियस
गोरखपुर – 44 डिग्री सेल्सियस

 

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