सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में खोली थी चाय की दुकान, यूपी से आई सिफारिश पर मिली थी मदद; कुछ दिन बाद उसी दुकान में मौत

Untitled-999-copy-1789784609864

हरिद्वार: निठारी कांड के आरोपित रहे सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में नई जिंदगी शुरू करने की कोशिश में चाय की दुकान खोली थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उसने छह सितंबर को सप्तऋषि मार्ग पर दुकान शुरू की थी। दुकान खोलने से पहले पूजा कराई और आसपास मिठाई व प्रसाद भी बांटा था। हालांकि, कुछ ही दिनों बाद उसकी मौत ने इलाके के लोगों को हैरान कर दिया।

पूजा के बाद शुरू की थी चाय की दुकान

स्थानीय लोगों के अनुसार, सुरेंद्र कोली ने छह सितंबर को सप्तऋषि मार्ग पर चाय की दुकान शुरू की थी। दुकान खोलने से पहले उसने विधि-विधान से पूजा कराई और लोगों को मिठाई बांटी। आसपास के लोगों का कहना है कि शुरुआती दिनों में उसका व्यवहार सामान्य और मिलनसार था।

पास की नाई की दुकान पर काम करने वाले रामलाल के मुताबिक, दुकान शुरू करने के एक-दो दिन तक सुरेंद्र ने चाय बेची। इसके बाद वह अचानक कुछ दिनों के लिए कहीं चला गया। करीब तीन-चार दिन पहले लौटने के बाद उसने दोबारा दुकान चलाना शुरू कर दिया था।

यूपी से आई थी सिफारिश की कॉल

रोशनाबाद के दुकानदार विशाल कश्यप उर्फ जय के मुताबिक, करीब डेढ़ महीने पहले उन्हें शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश में रहने वाले एक परिचित की बहन डॉ. वैष्णवी का फोन आया था। उन्होंने एक परेशान व्यक्ति के लिए सिडकुल में नौकरी और रहने के लिए कमरा दिलाने में मदद करने का आग्रह किया था।

विशाल के मुताबिक, उन्होंने सुरेंद्र को रोजगार और रहने के लिए कमरा दिलाने में मदद करने की बात कही थी। इसी दौरान सुरेंद्र ने हरिद्वार में अपने लिए नया काम शुरू करने की कोशिश की और बाद में चाय की दुकान संचालित करने लगा।

आसपास के लोगों को नहीं हुआ किसी परेशानी का अंदाजा

स्थानीय लोगों के मुताबिक, सुरेंद्र के सामान्य व्यवहार को देखकर किसी को ऐसा आभास नहीं हुआ कि वह किसी बड़ी परेशानी से गुजर रहा है। वह आसपास के लोगों से बातचीत करता था और कुछ लोग उसकी दुकान पर चाय पीने भी आते थे।

लाल माता मंदिर के पास लगी टोंटी से वह दुकान के लिए पानी भरता था। स्थानीय लोगों ने बताया कि उसके व्यवहार में ऐसा कुछ नजर नहीं आया, जिससे उसकी मानसिक स्थिति या निजी परेशानियों का अंदाजा लगाया जा सके।

परिवार के बच्चे के जन्मदिन पर पैसे की जरूरत थी

रोशनाबाद निवासी धर्मेंद्र कौशिक के मुताबिक, सुरेंद्र को परिवार के एक बच्चे के जन्मदिन पर कुछ धनराशि की जरूरत थी। वह बच्चे के लिए पैसे नहीं भेज पाने को लेकर परेशान नजर आ रहा था। धर्मेंद्र ने उसे दो हजार रुपये दिए थे और कुछ समय बाद लौटाने के लिए कहा था।

धर्मेंद्र के मुताबिक, सुरेंद्र के चेहरे पर उस समय बेबसी दिखाई दे रही थी। इसके बाद भी आसपास के लोगों को उसकी परेशानी की गंभीरता का अंदाजा नहीं था।

किसी को मानता था अपना बेटा

जानकारी के अनुसार, सुरेंद्र का गुरुवार को परिवार या किसी परिचित से फोन पर विवाद भी हुआ था। बातचीत के दौरान उसने कहा था कि उसके अपने बच्चे नहीं हैं, लेकिन वह किसी एक व्यक्ति को अपना बेटा मानता था।

उस व्यक्ति की एक तस्वीर का प्रिंट भी सुरेंद्र के पास था, जो बाद में उसकी डायरी के अंदर मिला। यह तस्वीर उसके निजी लगाव और पारिवारिक संबंधों से जुड़ी हुई बताई जा रही है।

चाय की दुकान ही बन गई आखिरी जगह

सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में नई शुरुआत के इरादे से चाय की दुकान खोली थी। दुकान शुरू करने के समय पूजा कराना और प्रसाद बांटना भी इसी नई शुरुआत का हिस्सा था। लेकिन दुकान खोलने के कुछ ही दिनों बाद उसका अचानक गायब होना और फिर लौटकर दुकान चलाना स्थानीय लोगों के लिए अब उसकी आखिरी दिनों की कहानी का हिस्सा बन गया है।

उसकी मौत के बाद पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और उसके आखिरी दिनों से जुड़े लोगों तथा परिस्थितियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

 

एक नज़र